हालिया आर्थिक विश्लेषण के अनुसार भारत की आयात पर निर्भरता अब तेल और सोने से कहीं आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, महत्वपूर्ण खनिजों और कुछ खाद्य श्रेणियों तक फैल चुकी है।
नीति-निर्माता इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहनों पर विचार कर रहे हैं।
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब देश वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के बीच विकास की महत्वाकांक्षाओं और आर्थिक मज़बूती के बीच संतुलन साध रहा है।