जाने-माने शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे उनके अनशन के 21वें दिन बिगड़ गई, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे।
सोनम वांगचुक लद्दाख के एक इंजीनियर-से-सामाजिक कार्यकर्ता बने शख्सियत हैं, जिनकी शिक्षा और पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में लंबे समय से पहचान रही है। उनकी जिंदगी से प्रेरित एक किरदार 2009 की चर्चित बॉलीवुड फिल्म में भी दिखाया गया था, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। बीते कुछ वर्षों में वे लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर कई बार अनशन कर चुके हैं।
यह ताजा अनशन मई महीने में हुए एक बड़े परीक्षा पेपर लीक मामले से जुड़ा है, जिसने लाखों छात्रों को प्रभावित किया था। इसी मुद्दे को लेकर एक युवा-नेतृत्व वाले संगठन ने जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया था, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। वांगचुक इस धरने के समर्थन में 28 जून से अनशन पर बैठे थे।
अनशन के 21वें दिन, 18 जुलाई को वांगचुक की सेहत काफी बिगड़ गई, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंचाया। इससे पहले भी धरना स्थल पर एक अन्य युवा प्रदर्शनकारी के बेहोश होकर अस्पताल पहुंचने की खबर आई थी। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है।
देश भर के कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है और उनसे अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील की है। सरकार और शिक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल वांगचुक की हालत पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है, और यह देखना बाकी है कि क्या वे अनशन जारी रखेंगे या डॉक्टरों की सलाह पर इसे स्थगित करेंगे। पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना जंतर-मंतर पर जारी है।
