पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है। जानकारों के अनुसार अगर यह टकराव और गहराता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ता है। तेल महंगा होने से परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। हालांकि भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाकर इस तरह के जोखिमों को कुछ हद तक कम करने की कोशिश की है।
