खगोल प्रेमियों के लिए यह सप्ताह खास रहने वाला है। हर साल दिखने वाला पर्सिड मीटियोर शावर इस सप्ताह अपने चरम पर पहुंचेगा, जिसमें रात के आसमान में टूटते तारों की बौछार का शानदार नज़ारा देखने को मिलेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह उल्कापात तब होता है जब पृथ्वी एक धूमकेतु के पीछे छूटे मलबे के क्षेत्र से गुजरती है। इस दौरान प्रति घंटे दर्जनों उल्काएं आसमान में चमकती हुई दिखाई दे सकती हैं।
इस नज़ारे को देखने के लिए शहर की रोशनी से दूर, अंधेरे और खुले आसमान वाली जगह सबसे उपयुक्त मानी जाती है। किसी दूरबीन की जरूरत नहीं, इसे खाली आंखों से भी आसानी से देखा जा सकता है।
