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J&K Medical Intern Hunger Strike: मेडिकल इंटर्न क्यों कर रहे भूख हड़ताल? जानें ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग

J&K के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और 2 डेंटल कॉलेजों के इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जानें ₹12,300 से ₹30,000 की मांग, 48 घंटे की भूख हड़ताल और सरकार का ताजा रुख।

J&K Medical Intern Hunger Strike: मेडिकल इंटर्न क्यों कर रहे भूख हड़ताल? जानें ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग

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J&K में भूख हड़ताल क्यों कर रहे मेडिकल इंटर्न? जानें क्या है उनकी प्रमुख मांगें

जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के MBBS और BDS इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। जानिए पूरा मामला।

ताजा अपडेट:

मेडिकल इंटर्न्स ने 7 सितंबर 2026 को 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मुख्य मांग मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करना और इस संबंध में लिखित सरकारी आदेश जारी करना है। हालांकि, 9 सितंबर को GMC Jammu के इंटर्न्स ने स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद अपनी हड़ताल अस्थायी रूप से रोक दी। सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है, जबकि इंटर्न्स की मूल मांग अभी खत्म नहीं हुई है।

जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड विवाद अब एक बड़े छात्र-चिकित्सा आंदोलन का रूप ले चुका है। MBBS और BDS इंटर्न्स का कहना है कि वे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी ड्यूटी, नाइट शिफ्ट और दूसरे क्लिनिकल कामों में योगदान देते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें मिलने वाला मासिक स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है।

इसी मांग को लेकर जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 2 डेंटल कॉलेजों के इंटर्न्स आंदोलन में शामिल हुए। शुरुआती विरोध के बाद मामला भूख हड़ताल तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग अब सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}

आखिर मेडिकल इंटर्न क्यों कर रहे हैं आंदोलन?

मेडिकल इंटर्नशिप MBBS और BDS की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रशिक्षण चरण होता है। इस दौरान इंटर्न अस्पतालों में मरीजों के साथ सीधे काम करते हैं और वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में क्लिनिकल जिम्मेदारियां निभाते हैं।

प्रदर्शन कर रहे इंटर्न्स का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में उन्हें वर्तमान में लगभग ₹12,300 प्रति माह स्टाइपेंड मिलता है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए। :contentReference[oaicite:2]{index=2}

इंटर्न्स का तर्क है कि कई वर्षों से महंगाई और रोजमर्रा के खर्च बढ़ने के बावजूद उनका स्टाइपेंड उसी स्तर पर बना हुआ है। उनका यह भी कहना है कि दूसरे राज्यों में मेडिकल इंटर्न्स को इससे ज्यादा स्टाइपेंड मिलता है।

इंटर्न्स की मुख्य मांग एक नजर में

  • मासिक स्टाइपेंड को ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए।
  • स्टाइपेंड बढ़ोतरी पर आधिकारिक सरकारी आदेश जारी हो।
  • लंबे समय से लंबित प्रस्ताव पर स्पष्ट फैसला लिया जाए।
  • मेडिकल इंटर्न्स के काम और जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय तय किया जाए।

48 घंटे की भूख हड़ताल क्यों शुरू की गई?

मेडिकल इंटर्न्स ने पहले सामान्य हड़ताल और विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया। लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बावजूद स्टाइपेंड बढ़ोतरी को लेकर तत्काल लिखित आदेश जारी नहीं होने के बाद आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया।

7 सितंबर को अलग-अलग मेडिकल संस्थानों के इंटर्न्स ने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, हर कॉलेज से कुछ इंटर्न्स ने स्वेच्छा से भूख हड़ताल में हिस्सा लिया। उनका कहना था कि वे सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि लंबे समय से लंबित मामले पर ठोस फैसला हो सके। :contentReference[oaicite:3]{index=3}

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें कई बार इंतजार करने और बातचीत का भरोसा दिया गया, लेकिन वे अब केवल मौखिक आश्वासन के बजाय सरकारी आदेश चाहते हैं।

स्टाइपेंड बढ़ाने की सिफारिश पहले भी हो चुकी है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नया नहीं है। इंटर्न्स का कहना है कि इस संबंध में 2023 में सिफारिश की गई थी, लेकिन उसके बाद भी बढ़ा हुआ स्टाइपेंड लागू नहीं हुआ।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार की ओर से पहले करीब ₹25,000 तक स्टाइपेंड बढ़ाने की सिफारिश का उल्लेख किया गया था। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे इंटर्न्स अब ₹30,000 की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि उन्हें इस संबंध में स्पष्ट और अंतिम सरकारी आदेश चाहिए। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

क्यों महत्वपूर्ण है 2023 की सिफारिश?

इंटर्न्स का कहना है कि अगर स्टाइपेंड बढ़ाने की प्रक्रिया कई साल पहले शुरू हो चुकी थी, तो अब भी अंतिम आदेश का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। इसी देरी को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ी है।

इंटर्न्स को ₹30,000 ही क्यों चाहिए?

प्रदर्शनकारी इंटर्न्स का कहना है कि मेडिकल इंटर्नशिप केवल क्लासरूम ट्रेनिंग नहीं है। उन्हें अस्पताल में नियमित ड्यूटी के साथ इमरजेंसी, नाइट शिफ्ट और अन्य क्लिनिकल जिम्मेदारियों में भी काम करना पड़ता है।

इंटर्न्स का दावा है कि मौजूदा ₹12,300 मासिक राशि उनके काम और बढ़ती जीवन-यापन लागत के हिसाब से कम है। कई प्रदर्शनकारियों ने दूसरे राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड का उदाहरण देते हुए कहा है कि समान प्रकार की इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को कई जगह ज्यादा भुगतान किया जाता है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}

हालांकि, अलग-अलग राज्यों के स्टाइपेंड की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि भुगतान की दरें राज्य सरकारों और संबंधित संस्थानों के नियमों के अनुसार अलग हो सकती हैं।

क्या इंटर्न्स की हड़ताल से मरीजों पर असर पड़ सकता है?

यह इस आंदोलन का सबसे संवेदनशील पहलू है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न्स अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक काम से दूर रहने पर अस्पतालों की सेवाओं और मरीजों की देखभाल पर दबाव पड़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने भी इंटर्न्स से ड्यूटी पर लौटने की अपील की है और कहा है कि मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, इंटर्न्स अपनी मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े रहे। :contentReference[oaicite:6]{index=6}

क्या कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई की?

आंदोलन के दौरान कुछ मेडिकल कॉलेजों की ओर से इंटर्न्स को ड्यूटी पर वापस लौटने के निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि अनुपस्थित रहने पर प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

वहीं, प्रदर्शनकारी इंटर्न्स ने आरोप लगाया कि आंदोलन खत्म करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित कॉलेजों और प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी भी आरोप को अंतिम तथ्य के रूप में देखने के बजाय उसे संबंधित पक्ष के दावे के रूप में समझना जरूरी है। :contentReference[oaicite:7]{index=7}

अब सरकार का क्या रुख है?

सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर काम चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने इंटर्न्स को आश्वासन दिया कि स्टाइपेंड में संशोधन किया जाएगा।

9 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, GMC Jammu के MBBS इंटर्न्स ने अपना आंदोलन अस्थायी रूप से रोक दिया। यह फैसला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के उस आश्वासन के बाद आया कि मासिक स्टाइपेंड को संशोधित और बढ़ाया जाएगा। हालांकि, इंटर्न्स ने स्पष्ट किया है कि उनकी मूल मांग खत्म नहीं हुई है और वे औपचारिक कार्रवाई चाहते हैं। :contentReference[oaicite:8]{index=8}

MediaHunt Fact Check

दावा: J&K के मेडिकल इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं।

स्थिति: सही। 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 2 डेंटल कॉलेजों के MBBS/BDS इंटर्न्स ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन किया और 7 सितंबर को 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की।

महत्वपूर्ण अपडेट: 9 सितंबर को GMC Jammu के इंटर्न्स ने सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल अस्थायी रूप से रोक दी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे J&K में आंदोलन अभी भी बिल्कुल उसी स्थिति में जारी है। स्थिति संस्थान और सरकार की अगली कार्रवाई के साथ बदल सकती है।

J&K मेडिकल इंटर्न विवाद: 5 बड़े सवाल

1. वर्तमान स्टाइपेंड कितना है?

रिपोर्टों के अनुसार करीब ₹12,300 प्रति माह।

2. इंटर्न्स कितने स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं?

प्रदर्शनकारी इंटर्न्स ₹30,000 प्रति माह की मांग कर रहे हैं।

3. कितने संस्थान आंदोलन से जुड़े?

10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और 2 डेंटल कॉलेज।

4. भूख हड़ताल क्यों की गई?

सरकार से स्टाइपेंड बढ़ोतरी का लिखित और आधिकारिक आदेश जारी कराने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से।

5. क्या सरकार ने मांग मान ली है?

सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने का आश्वासन दिया है, लेकिन औपचारिक आदेश और अंतिम लागू राशि की स्थिति पर अभी नजर बनी हुई है।

निष्कर्ष

जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंटर्न्स का आंदोलन सिर्फ स्टाइपेंड की रकम बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे लंबे समय से लंबित प्रशासनिक प्रक्रिया, महंगाई, अस्पतालों में इंटर्न्स की जिम्मेदारियां और दूसरे राज्यों के मुकाबले भुगतान में अंतर जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।

48 घंटे की भूख हड़ताल ने सरकार पर दबाव जरूर बढ़ाया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक सरकारी आदेश कब जारी होता है और उसमें कितनी राशि तय की जाती है।

फिलहाल GMC Jammu के इंटर्न्स ने सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से वास्तविक आदेश जारी होता है या नहीं, यही इस पूरे विवाद की अगली बड़ी कड़ी होगी। :contentReference[oaicite:9]{index=9}

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MediaHunt का उद्देश्य किसी वायरल दावे को दोहराना नहीं, बल्कि खबर के पीछे की पूरी तस्वीर को सरल भाषा में समझाना है। हम उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर तथ्य, दावे और अपडेट को अलग-अलग रखते हैं।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट की जानकारी के लिए India Today, Indian Express, The Tribune, Hindustan Times, Medical Dialogues और अन्य उपलब्ध रिपोर्टों को क्रॉस-चेक किया गया है।

Disclaimer: यह एक समाचार-आधारित रिपोर्ट है। आंदोलन और सरकारी निर्णयों की स्थिति तेजी से बदल सकती है। अंतिम स्टाइपेंड राशि और लागू होने की तारीख के लिए संबंधित सरकारी आदेश को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।     

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प्रार्थना शर्मा

भारतीय राजनीति और नीति पर 10 वर्षों से अधिक न्यूज़रूम अनुभव।

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