500 साल पुराने World Map में बड़ा बदलाव? UN ने Equal Earth Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी
Mercator Map में अफ्रीका और दूसरे क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से अलग क्यों दिखाई देता है? जानिए नए Equal Earth Projection और UN के फैसले की पूरी कहानी।
दुनिया का नक्शा देखकर हम बचपन से ही देशों और महाद्वीपों का आकार समझते आए हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कागज या स्क्रीन पर दिखाई देने वाला यह नक्शा धरती के वास्तविक आकार को पूरी तरह सही दिखाता है?
दरअसल, ऐसा नहीं है। पृथ्वी गोल है और उसे एक सपाट कागज पर दिखाने के लिए अलग-अलग तरह की Map Projection तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सबसे प्रसिद्ध तकनीकों में से एक है Mercator Projection। अब संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के नक्शों में मौजूद इस तरह की विकृतियों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
UN ने क्या फैसला लिया?
4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map: Rebalancing global cartographic representation and promoting equitable representation of the world's regions, particularly Africa” नाम के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
मतदान में 164 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, 1 देश ने विरोध किया और 6 देशों ने abstain किया। अमेरिका प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाला एकमात्र देश था। भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे World Maps को बढ़ावा देना है जिनमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे।
सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि “UN ने Mercator Map को पूरी तरह बदल दिया है” या “अब Mercator Map इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।” यह सही नहीं है। UN का प्रस्ताव non-binding है। इसका मकसद ज्यादा accurate map projections के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, न कि Mercator को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करना।
Mercator Map में समस्या क्या है?
Mercator Projection को फ्लेमिश cartographer Gerardus Mercator ने 1569 में तैयार किया था। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री यात्रा में दिशा और navigation को आसान बनाना था।
इस Projection की खासियत यह थी कि समुद्र में एक निश्चित दिशा में चलने वाले रास्तों को नक्शे पर सीधी रेखा के रूप में दिखाया जा सकता था। इसलिए यह navigation के लिए बहुत उपयोगी साबित हुआ।
लेकिन इसकी एक बड़ी कमी भी है। जैसे-जैसे कोई क्षेत्र भूमध्य रेखा यानी Equator से उत्तर या दक्षिण की ओर जाता है, उसका नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में बहुत ज्यादा बड़ा हो सकता है।
Africa और Greenland का उदाहरण क्यों दिया जा रहा है?
इस पूरी बहस में Africa और Greenland का उदाहरण सबसे ज्यादा चर्चा में है।
वास्तविक क्षेत्रफल की बात करें तो Africa लगभग 30.3 million square kilometres में फैला हुआ है, जबकि Greenland का क्षेत्रफल लगभग 2.2 million square kilometres है। यानी Africa, Greenland से लगभग 14 गुना बड़ा है।
लेकिन Mercator जैसे नक्शे पर Greenland का आकार Africa के मुकाबले बहुत ज्यादा बड़ा दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि ऐसे नक्शे को देखकर किसी व्यक्ति को दोनों क्षेत्रों के वास्तविक आकार का गलत अंदाजा हो सकता है।
एक आसान उदाहरण
असल दुनिया में: Africa ≈ Greenland से 14 गुना बड़ा
Mercator Map पर: Greenland वास्तविक आकार से बहुत बड़ा दिखाई देता है।
Equal Earth Projection क्या है?
Equal Earth Projection एक modern map projection है जिसे 2018 में cartographers की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने विकसित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों के relative area को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है।
इसका मतलब यह नहीं है कि Equal Earth पर धरती का हर हिस्सा बिल्कुल वैसा ही दिखेगा जैसा globe पर दिखाई देता है। ऐसा किसी भी flat world map में पूरी तरह संभव नहीं है।
जब एक गोल पृथ्वी को सपाट कागज पर उतारा जाता है तो किसी न किसी रूप में shape, distance, direction या area में distortion आना तय है। अलग-अलग projections अलग उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं।
क्या Equal Earth Map पूरी तरह सही है?
नहीं। यह समझना बहुत जरूरी है।
दुनिया का कोई भी flat map पृथ्वी को 100 प्रतिशत बिना distortion के नहीं दिखा सकता। Equal Earth का फायदा यह है कि यह land areas के relative size को बेहतर तरीके से दिखाने के लिए design किया गया है।
इसलिए अगर उद्देश्य यह समझना है कि Africa, Europe, South America या Greenland वास्तव में एक-दूसरे की तुलना में कितने बड़े हैं, तो Equal Earth जैसी equal-area projection ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
क्या अब Mercator Map खत्म हो जाएगा?
नहीं। यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण fact-check है।
संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव Mercator Projection को प्रतिबंधित नहीं करता। Mercator अभी भी कुछ खास परिस्थितियों में उपयोगी है, खासकर maritime navigation जैसे क्षेत्रों में।
UN का जोर इस बात पर है कि जब किसी नक्शे का उद्देश्य देशों और महाद्वीपों का वास्तविक आकार समझाना हो, तब ज्यादा accurate equal-area projections का इस्तेमाल किया जाए।
यानी आने वाले समय में स्कूलों, educational material, international organisations, media और digital mapping platforms में alternative projections का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
भारत ने क्या किया?
भारत ने UN के “Correct the Map” प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि map projection के बदलाव का मतलब भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रीय दावों को बदलना नहीं है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि Map Projection और International Borders दो अलग विषय हैं। Projection यह तय करती है कि गोल पृथ्वी को सपाट नक्शे पर कैसे दिखाया जाए, जबकि सीमा से जुड़े मुद्दे अलग राजनीतिक और कानूनी विषय हैं।
क्या इससे Google Maps भी बदल जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि Google Maps या सभी online maps तुरंत बदल जाएंगे।
UN का resolution legally binding नहीं है। इसलिए अलग-अलग सरकारें, schools, publishers और technology companies अपने उपयोग और जरूरत के हिसाब से map projection चुन सकती हैं।
हालांकि UN का यह फैसला दुनिया के नक्शों को लेकर international discussion को जरूर तेज कर सकता है। आने वाले समय में educational maps और global reference maps में Equal Earth या दूसरी equal-area projections का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है।
यह बदलाव इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
नक्शा सिर्फ रास्ता दिखाने का साधन नहीं है। दुनिया को हम जिस तरह देखते हैं, उसमें maps की बड़ी भूमिका होती है।
अगर किसी महाद्वीप को लगातार उसके वास्तविक आकार से बहुत छोटा दिखाया जाए और दूसरे क्षेत्रों को ज्यादा बड़ा दिखाया जाए, तो लोगों की geographical understanding पर उसका असर पड़ सकता है।
इसी वजह से African Union और “Correct the Map” अभियान से जुड़े संगठनों ने लंबे समय से ज्यादा accurate world maps के इस्तेमाल की मांग की थी।
UN का नया resolution इसी बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाता है। हालांकि इसे सिर्फ “Africa को बड़ा दिखाने वाला फैसला” कहना भी अधूरा होगा। असली मुद्दा यह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों का क्षेत्रफल ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाए।
क्या 500 साल बाद दुनिया का नक्शा सच में बदल गया?
पूरी तरह से नहीं। यह headline समझने का सबसे सही तरीका है।
Mercator Projection लगभग 450 से ज्यादा वर्षों से मौजूद है और आज भी कई जगह इस्तेमाल होती है। लेकिन UN General Assembly के नए resolution ने पहली बार इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी नीति और representation debate का हिस्सा बना दिया है।
इसलिए इसे “World Map बदलने की दिशा में बड़ा कदम” कहना ज्यादा सही होगा, बजाय इसके कि “पुराना नक्शा आज से खत्म हो गया।”
सीधी भाषा में समझें
- Mercator Map 1569 में बनाया गया था।
- यह मुख्य रूप से navigation के लिए बनाया गया था।
- इसमें Equator से दूर के क्षेत्रों का आकार ज्यादा बड़ा दिखाई देता है।
- इसी वजह से Greenland और Africa का visual comparison भ्रामक हो सकता है।
- Equal Earth 2018 में विकसित की गई modern equal-area projection है।
- UN General Assembly ने 2026 में “Correct the Map” resolution को मंजूरी दी।
- 164 देशों ने समर्थन किया, 1 ने विरोध किया और 6 ने abstain किया।
- यह resolution legally binding नहीं है और Mercator Map पर प्रतिबंध नहीं लगाता।
FAQ: World Map और Equal Earth से जुड़े सवाल
क्या UN ने Mercator Map को ban कर दिया?
नहीं। UN का resolution non-binding है। इसका उद्देश्य ज्यादा accurate और equal-area map projections के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
क्या Equal Earth दुनिया का सबसे accurate map है?
यह area यानी क्षेत्रफल को बेहतर तरीके से दिखाता है, लेकिन कोई भी flat map पृथ्वी को हर पहलू में पूरी तरह accurate नहीं दिखा सकता।
Africa वास्तव में कितना बड़ा है?
Africa का क्षेत्रफल लगभग 30.3 million square kilometres है। यह Greenland से लगभग 14 गुना बड़ा है।
क्या भारत ने Equal Earth Map को support किया?
भारत ने UN के “Correct the Map” resolution के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि भारत ने map projection और भारत की sovereign borders के मुद्दों को अलग रखने की बात स्पष्ट की है।
क्या Google Maps अब तुरंत बदल जाएगा?
ऐसा कोई तत्काल बदलाव घोषित नहीं हुआ है। UN resolution legally binding नहीं है, इसलिए technology companies अपने अलग technical requirements के अनुसार projection का इस्तेमाल कर सकती हैं।
“UN ने दुनिया का पुराना नक्शा बंद कर दिया” कहना भ्रामक है। सही बात यह है कि UN General Assembly ने दुनिया के नक्शों में continental size की distortion को कम करने और Equal Earth जैसी equal-area projections को बढ़ावा देने वाले non-binding resolution को मंजूरी दी है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। किसी भी स्रोत की भाषा या लेख को कॉपी नहीं किया गया है। Map projections से जुड़े technical विवरण को सरल भाषा में समझाने के लिए प्रस्तुत किया गया है।



